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जैसे आप सोचते हैं, वैसे बन जाते हैं
सभी अध्याय

हिंदी वर्जन
​8 मिनट पढ़ने का समय
जैसे आप अपने मन में सोचते हैं वैसे ही आप होते हैं
As You Thinketh - Character
अध्याय 1: मन की सोच

जिस तरह हम सोचते हैं, वह हमारी वास्तविकता का रूप ले लेता है। हमारे मस्तिष्क के विचार हमारी शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक स्थिति को निर्धारित करते हैं। हम जैसे सोचते हैं, वैसे बनते हैं।

यदि हम सकारात्मक विचारों के साथ सोचते हैं तो हम उन्हें अपने अभिव्यक्ति के रूप में व्यक्त करते हैं और इस तरह सकारात्मक वातावरण को बढ़ावा देते हैं। अन्यत्र, यदि हम नकारात्मक विचारों के साथ सोचते हैं तो हम उन्हें अपने अभिव्यक्ति के रूप में व्यक्त करते हैं और इस तरह नकारात्मक वातावरण को बढ़ावा देते हैं।

हमारी सोच न ही केवल हमारे व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करती है, बल्कि हमारे परिवार, समाज और समस्त मानवता को भी प्रभावित करती है।
इसलिए, हमें ध्यान देना चाहिए कि हम कैसे सोचते हैं और कैसे अपने मस्तिष्क को सकारात्मक विचारों से भरते हैं। जैसे हम खाने को शुद्ध रखने के लिए उतना ही

अध्याय २: मन की शक्ति

मनुष्य जो कुछ सोचता है उसे वहीं तक पहुँचाता है। जैसे कि एक बुद्धिमान व्यक्ति जो अपने दिमाग में एक उद्देश्य को सोचता है, उसे उस उद्देश्य की ओर बढ़ने का रास्ता जल्दी ही मिल जाता है। दूसरी ओर, एक जो अपने मन में नकारात्मक विचार घर करता है, उसे अपने लक्ष्यों से दूर जाना पड़ता है। यह मनुष्य के मन की शक्ति का परिणाम होता है।

आपके मन के विचार आपके जीवन के निर्माण का निर्माता होते हैं। जैसे कि एक बीज जो धरती में रोपित किया जाता है, अपने आप में एक पूर्ण वृक्ष का संचार करता है, वैसे ही आपके मन के विचार आपके जीवन के सभी क्षेत्रों में अपना प्रभाव डालते हैं। इसलिए यदि आप अपने जीवन को सफल बनाना चाहते हैं, तो आपको अपने मन के विचारों को ध्यान से चुनना चाहिए।
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एक व्यक्ति जो अपने जीवन को सफल बनाना चाहता है, उसे एक उद्देश्य का चयन करना होगा और उसकी ओर समझौता करना होगा

अध्याय 3: मन एक बाग़ है

जैसे जंगल में वृक्ष और झाड़ियों का समूह एक जंगल बनाता है, वैसे ही मन की विभिन्न विचारों की शक्तियों का समूह एक मन के रूप में दिखता है। मन की शक्तियों का उपयोग करने वाला व्यक्ति अपने आप में शक्तिशाली होता है और जीवन के उच्चतम स्तरों तक पहुंच सकता है।

मन एक बाग़ है जिसे तुम खेत बना सकते हो जहां तुम अच्छे विचारों के बीज बो सकते हो और बुरे विचारों की खेती नहीं कर सकते। जैसे बच्चे नरम घास को एक तरह से ढालने वाले वृक्षों के ऊपर खेलते हैं, वैसे ही अपने दिमाग के विचारों को भी तुम एक तरह से नियंत्रित कर सकते हो।

यदि तुम उन विचारों को बुरे बीजों की तरह बोते हो जो बुरे फल देते हैं, तो तुम्हारा मन एक बुरे खेत के समान हो जाएगा। जब तुम अपने दिमाग के विचारों का नियंत्रण नहीं कर पाते हो, तो वे तुम्हें नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए, तुम्हें अपने मन को सबसे अच्छे विचारों स
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अध्याय ४ - विचार और उद्देश्य

अब तक हमने देखा है कि मन की गतिविधियों से हमारे जीवन की गति निर्धारित होती है। इस बात को अगले स्तर तक बढ़ाते हुए, जो कुछ हम सोचते हैं, उन्हें हम प्रभावित करते हैं, और जो कुछ हम बोलते हैं उनका भी हमें प्रभाव पड़ता है। जो कुछ हम करते हैं, उससे हम दूसरों के जीवन पर असर डालते हैं। इसलिए, हमें सोचने, बोलने और करने के लिए उसी तरह की चीजें चुननी चाहिए जो हमें अपने जीवन के उद्देश्य के निर्धारण में मदद करें।

जिस प्रकार खेत में बोए गए बीज से वह फल पैदा करता है जो उसमें होता है, उसी तरह जो कुछ हम सोचते हैं, उससे हम अपने जीवन की समृद्धि या अपने जीवन के दुख का फल उगाते हैं। हमारे सोचने का तरीका हमारी मनोदशा का निर्माण करता है, जो हमारे जीवन के कई पहलुओं को प्रभावित करती है।

जो कुछ हम अपने मन में सोचते हैं, वह हमेशा हमारे साथ होता है, और उससे हमारी संजीवनी या मृत्यु का


अध्याय ५: मन का शुद्धिकरण

एक व्यक्ति का मन उसके भविष्य की स्थिति निर्धारित करता है। हम जो सोचते हैं, वह हमारी प्रवृत्ति का कारण बन जाता है। यदि हम अपने मन को शुद्ध रखेंगे, तो हमारे जीवन में भी शुद्धता आएगी। एक शुद्ध मन एक शुद्ध जीवन का निर्माण करता है।

मन के शुद्धिकरण के लिए, हमें अपनी आवश्यकताओं को व्यक्त करना चाहिए और उन्हें शांत दिमाग से विचार करना चाहिए। हमें अपनी सोच के अभ्यास को उन विचारों से पृथक करना चाहिए जो हमें नुकसान पहुंचाते हैं और जो हमारे लक्ष्यों को रोकते हैं। इसके बजाय, हमें उन विचारों को चुनना चाहिए जो हमें सकारात्मक दिशा में ले जाएँगे।

इसके अलावा, हमें अपनी सोच की अभ्यास को निरंतर बनाए रखना चाहिए। हमें अपने विचारों को स्पष्ट करने की अभ्यास करनी चाहिए, जैसे कि हम नए भाषा की अभ्यास करते हुए करते हैं। जब हम अपने विचारों को स्पष्ट करते हैं, तो हमें उन्ह

अध्याय 6: आपका मन आपकी शक्ति
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एक व्यक्ति के जीवन में मन की महत्वपूर्ण भूमिका है, यह उनके संपूर्ण व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण घटक है। हमारे मन के विचार हमें सोचने, करने, बनने और करतब दिखाने में मदद करते हैं। हम उन विचारों को उत्पन्न करते हैं, जो हमें अपने जीवन में सफलता या विफलता के मार्ग पर ले जाते हैं।

आपके मन में जो विचार होते हैं, वे आपकी शक्ति का मूल होते हैं। यदि आप अपने मन में नकारात्मक विचारों को उत्पन्न करते हैं, तो आप उन विचारों से प्रभावित होते हैं और नकारात्मकता आपकी जिंदगी के अन्य क्षेत्रों में भी प्रभाव डालती है। इसके बदले, यदि आप अपने मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न करते हैं, तो आप उन विचारों से प्रभावित होते हैं और अपनी जिंदगी के हर क्षेत्र में सकारात्मक विचारों का प्रभाव फैलाते हैं।

आपकी सकारात्मक सोच आपकी शक्ति होती है जो आपको अपने लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करती है। इसक

अध्याय 7 - शांति

मैं एक सोच हूँ, वही मैं हूँ। जैसी मेरी सोच है, वैसा मेरा रूप है। यह न केवल मेरी भावनाओं को प्रभावित करता है, बल्कि मेरे कार्यों, विचारों और संवेदनाओं को भी। मैं अपने अन्दर उस स्थान की नींव रखता हूँ जहाँ से मेरी सोच उठती है। यदि मैं नकारात्मकता से भरा हुआ हूँ, तो मेरा संचार उसी तरह होगा। विपरीत, यदि मैं सकारात्मकता से भरा हुआ हूँ, तो मैं उसी तरह से संचार करूँगा।

हमारी सोच हमारे भावनाओं और कार्यों को निर्देशित करती है। यदि हम सकारात्मक हों, तो हम जीवन के हर पहलू से खुश रहते हैं। हम आसानी से समस्याओं का सामना करते हैं और सकारात्मक उत्तर ढूंढते हैं। अन्यथा, नकारात्मक सोच हमारे जीवन को विकटता से भर देती है। हम बीमार हो जाते हैं, समस्याओं से परेशान हो जाते हैं, और अपने जीवन में निराशा का अनुभव करते हैं।

यदि हम अपनी सोच को बदल सकते हैं, तो हम अपने जीवन को भी बदल सकते हैं। हम


उद्धरण और अंश
  • एक व्यक्ति वास्तव में वह है जो वह सोचता है, उसका चरित्र सभी उसकी सोचों के समूह की पूर्ण जमा होता है।
  • इंसान खुद अपने आप को बनाता या नष्ट करता है; उसके विचारों की शस्त्रशाला में वह अपने आप के लिए वह उपकरणों को बनाता है जिससे वह अपने लिए स्वर्गीय सुख, शक्ति और शांति के आश्रय का निर्माण करता है; उसी शस्त्रशाला में उसने अपने लिए वह शस्त्र भी बनाए हैं जिनसे वह अपने आप को नष्ट करता है।
  • मन विचार का स्वामी है, चरित्र का निर्माता है, और स्थिति, परिवेश और भाग्य का निर्माता एवं आकारक है।

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